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Rabies vaccine: क्यों है 100% घातक रेबीज बीमारी और कैसे बचा सकते हैं समय पर टीकाकरण से जान

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Rabies vaccine: रेबीज एक जानलेवा वायरस जनित बीमारी है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सबसे खतरनाक बीमारियों में गिना है। यह बीमारी संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या यहां तक कि खुले घाव को चाटने से भी फैल सकती है। सबसे गंभीर बात यह है कि एक बार इसके लक्षण दिखने के बाद मरीज की जान बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि रेबीज से बचाव के लिए समय पर वैक्सीनेशन को ही एकमात्र उपाय माना गया है।

क्यों होता है रेबीज इतना खतरनाक?
राजस्थान के पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ. एन.आर. रावत बताते हैं कि हर वायरस की तरह रेबीज का भी इनक्यूबेशन पीरियड (लक्षण आने का समय) और विंडो ऑफ सेफ्टी (सुरक्षा का समय) होता है। यह अवधि सामान्यत: कुछ दिनों से लेकर 3 से 8 सप्ताह तक होती है। अगर इस दौरान वैक्सीनेशन हो जाए तो वायरस को शरीर में फैलने से रोका जा सकता है।

लेकिन यदि वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) में पहुंच जाए तो मरीज की मौत निश्चित होती है। एक बार नसों और दिमाग पर अटैक करने के बाद यह बीमारी 5 से 15 दिन के भीतर जान ले लेती है। यही वजह है कि इसे 100% घातक कहा जाता है।

लक्षण दिखने के बाद क्यों नहीं बचता मरीज?
संक्रमित जानवर के काटने के बाद वायरस सबसे पहले खून और टिश्यू में जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचकर नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। एक बार वायरस वहां पहुंच जाए तो दवाओं और इलाज का असर नहीं होता। इसलिए लक्षण दिखने से पहले टीकाकरण ही बचाव का एकमात्र तरीका है।

रेबीज वैक्सीन कब और कितनी लगती है?
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. समीर भाटी के मुताबिक, WHO ने रेबीज वैक्सीनेशन का शेड्यूल तय किया है। इसमें 4 या 5 डोज शामिल होते हैं।
Day 0 (काटने का दिन): 24–72 घंटे के भीतर पहला टीका
Day 3: दूसरा डोज
Day 7: तीसरा डोज
Day 14: चौथा डोज
Day 28: कई देशों में पांचवां डोज भी लगाया जाता है
बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी के लिए यह शेड्यूल समान है। फर्क सिर्फ डोज़ की मात्रा (ml) में होता है, जो डॉक्टर वजन और उम्र के हिसाब से तय करते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
अगर संक्रमित जानवर ने काटने के बजाय केवल घाव को चाटा है, तब भी वैक्सीन जरूरी है।
हमेशा पूरा कोर्स पूरा करें, बीच में रोकना खतरनाक हो सकता है।
घरेलू नुस्खों या झोलाछाप इलाज में समय बर्बाद न करें।
काटने के तुरंत बाद साबुन और पानी से घाव धोना भी बेहद जरूरी है।

रेबीज भले ही लाइलाज और जानलेवा बीमारी हो, लेकिन सही समय पर कदम उठाकर इसे रोका जा सकता है। समय पर वैक्सीनेशन ही इस बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित और असरदार उपाय है।

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