pregnancy tumor case: नई दिल्ली से एक दुर्लभ लेकिन प्रेरणादायक मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने 25 साल की गर्भवती महिला के शरीर से बास्केटबॉल के आकार का विशाल ओवरी ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया और हैरानी की बात यह रही कि ऑपरेशन के बाद भी महिला का गर्भ सुरक्षित रहा। यह केस इस मायने में खास है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान इतनी बड़ी और जोखिम भरी सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
राजस्थान के भिवाड़ी की रहने वाली यह महिला पहली बार गर्भवती हुई थी। गर्भावस्था के 14वें हफ्ते में जब नियमित अल्ट्रासाउंड कराया गया, तो डॉक्टरों को पेट में असामान्य और बड़ा सा ट्यूमर दिखाई दिया। जांच में पता चला कि यह ट्यूमर ओवरी (अंडाशय) से जुड़ा हुआ है। शुरुआती आशंका थी कि यह कैंसर भी हो सकता है। गर्भावस्था की स्थिति में सर्जरी करना जोखिम भरा था क्योंकि माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी था।
हाई-रिस्क सर्जरी का फैसला
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका की टीम ने गहन विचार के बाद ओपन सर्जरी का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में ट्यूमर के साथ प्रभावित ओवरी और फैलोपियन ट्यूब भी निकालनी पड़ी। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने खास ध्यान रखा कि ट्यूमर न फटे और गर्भाशय पर दबाव न पड़े। नतीजतन, शिशु पूरी तरह सुरक्षित रहा।
डॉक्टरों का कहना
डॉ. सरिता कुमारी (कंसल्टेंट, गायनी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) के मुताबिक़, गर्भावस्था में इतना बड़ा ट्यूमर मिलना बेहद असामान्य है और इसका उपचार बेहद सटीक तरीके से करना पड़ता है। यह केस बताता है कि समय पर जांच और आधुनिक इलाज से असंभव लगने वाली स्थिति को भी संभाला जा सकता है।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी यूनिट हेड डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि करीब 10,000 गर्भवती महिलाओं में से केवल 1 में ओवरी का कैंसरस ट्यूमर देखने को मिलता है और ओवरी सारकोमा तो और भी दुर्लभ है। सही रणनीति और समय पर इलाज से ही माँ और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।
महिला और बच्चे की स्थिति
सर्जरी के तीन दिन बाद ही महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जांच में पाया गया कि ट्यूमर ओवरी सारकोमा था, लेकिन वह शरीर में और कहीं नहीं फैला था। अच्छी बात यह रही कि महिला ने गर्भावस्था पूरी की और बाद में स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर बड़े ऑपरेशन से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस मामले में ट्यूमर निकालना ज़रूरी था क्योंकि यह माँ की जान के लिए खतरा बन सकता था। सही समय पर की गई सर्जरी ने न सिर्फ माँ की जान बचाई बल्कि शिशु को भी सुरक्षित रखा। यह केस इस बात का प्रमाण है कि समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमवर्क से जटिल से जटिल मेडिकल स्थितियों का समाधान संभव है।
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